मध्यप्रदेश में कर्मचारियों के प्रमोशन मामले में हाईकोर्ट में अब 9 सितंबर को सुनवाई होगी। इससे पहले कोर्ट ने डीपीसी रोकने का आदेश दिया था।
कोर्ट ने किया यह सवाल
दरअसल, सरकार ने 9 साल से अटकी पदोन्नतियां शुरू करने के लिए प्रमोशन नियम 2025 बनाए थे, जिनमें प्रमोशन में आरक्षण से जुड़े प्रावधानों को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। मामले में पिछली सुनवाई 7 जुलाई को हुई थी। तब कोर्ट ने सवाल किया था कि जब पदोन्नति में आरक्षण को लेकर सरकार की याचिका पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, तो नए नियम बनाने से पहले उसे वापस क्यों नहीं लिया गया ?
हाईकोर्ट ने यह भी कहा
सरकार ने पहली बार आदेश में यह भी लिखा है कि होने वाली पदोन्नतियां सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले पर निर्भर होंगी। हाईकोर्ट ने 7 जुलाई की सुनवाई में ही आदेश दिया था कि अगली तारीख तक नए नियमों पर आधारित डीपीसी (विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक) न की जाए।
मध्यप्रदेश लोक सेवा पदोन्नति नियम, 2025
सीधी भर्ती के पदों में SC-ST को आरक्षण
मध्यप्रदेश सरकार ने प्रमोशन के नए नियमों में रिजर्व कैटेगरी को प्रतिनिधित्व और प्रशासनिक दक्षता और योग्यता को महत्व दिया है। सीधी भर्ती के पदों में SC-ST वर्ग के अधिकारी-कर्मचारियों को 16 से 20 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान है। सरकार प्रमोशन में भी इन्हें इसी आधार पर आगे बढ़ने का मौका देने के लिए प्रतिबद्ध है। गजट नोटिफिकेशन जारी होने के साथ ही सरकार के प्रमोशन के नियम प्रभावी हो गए हैं।
विभागीय प्रमोशन कमेटी बनेगी
सरकार की ओर से प्रमोशन से भरे जाने वाले हर कैडर के पद अलग से तय होंगे। इसके लिए विभागीय प्रमोशन कमेटी फैसला लेगी। कमेटी के अध्यक्ष विभाग के सचिव और विभाग के अध्यक्ष सचिव होंगे। कमेटी में उपसचिव या उससे ऊंचे पद का GAD का एक ऑफिसर भी शामिल होगा।
