सजा को मजाक बनाने वालों को भी सजा मिले

तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री शशिकला किसी परिचय की मोहताज नहीं हैं। यद्यपि उनकी ख्याति नकारात्मक कारणों से ही रही है। जयललिता की निकटस्थ सहेली होने की वजह से वे अद्रमुक पार्टी तथा राज्य की सरकार में एक समानांतर शक्ति बन गई थीं। अम्मा की मौत के उपरांत वे कुछ समय के लिए मुख्यमंत्री बनीं किन्तु दुर्भाग्य ने उन्हें जेल भिजवा दिया। यदि जयललिता जीवित होतीं तब दोनों सहेलियां एक साथ कैद में रहतीं। जेल में अपने लिए विशेष सुविधाओं की मांग करने की उनकी अर्जी ठुकरा दिए जाने के बाद शशिकला एक सामान्य कैदी की तरह रही थीं और उनके बारे में समाचार आने भी रुक गए थे लेकिन अचानक वे एक बार फिर सुर्खियों में आ गईं। बेंगलुरू की जिस जेल में शशिकला बंद हैं उसका निरीक्षण करने के बाद डीआईजी जेल डी. रूपा ने राज्य के वरिष्ठ डीजीपी को पत्र लिखकर बताया कि सत्यनारायण राव नामक डीजीपी द्वारा शशिकला से दो करोड़ रुपए का सौदा करने के बाद उन्हें विशेष सुख-सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं जिनमें विशेष किस्म की रसोई भी है। रूपा ने जेल में नशीली दवाओं के सेवन की बात भी अपने पत्र में कही है। अपनी ईमानदारी एवं सख्ती के कारण प्रसिद्ध हो चुकीं रूपा के इस खुलासे की देश भर में चर्चा है। वैसे ये पहला अवसर नहीं है जब विशिष्ट जनों को जेल के भीतर एशोआराम के सभी साधन आसानी से उपलब्ध कराने का खुलासा हुआ हो। शशिकला तो खैर, पूर्व मुख्यमंत्री हैं लेकिन कुख्यात अपराधियों एवं माफिया सरगनाओं के लिए जेल में रहते हुए मोबाईल फोन के जरिए अपना कारोबार चलाने की सुविधा मिलने की बात सर्वविदित है। उनके लिए बैरक के भीतर ही टीवी, बढिय़ा भोजन, सेवकों की फौज उपलब्ध रहती है। शराब-कबाब का भी इंतजाम रखा जाता है। जाहिर है ये सब जेल प्रशासन की सहमति से होता है जिसकी भरपूर कीमत वसूली जाती है। हालांकि रूपा ने जिस अधिकारी पर शशिकला से 2 करोड़ का सौदा करने का आरोप लगाया उसने धौंस भी दी है कि वह अपने से कनिष्ठ रूपा द्वारा लगाए गए आरोप को लेकर उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की अनुशंसा करेगा। लेकिन उक्त महिला अधिकारी ने जिस दबंगी से राज्य के वरिष्ठ डीजीपी को लिखित रिपोर्ट भेजी है वह निराधार नहीं हो सकती। एक बार मान लें कि उनके सभी आरोप सही नहीं होंगे किन्तु शशिकला जैसी महिला साधारण कैदी बनकर जेल में दिन काटे ये भी गले नहीं उतरता और फिर न सिर्फ बेंगलुरू वरन् देश की सभी छोटी-बड़ी जेलों में भ्रष्टाचार खुलेआम होता है। सुविधाओं के एवज में पैसे का खेल खुलकर चलता है। कैदियों तक खाने-पीने की चीजों के अलावा भी जो वे चाहते हैं सब कुछ पहुंच जाता है। हां, इतना जरूर है कि अतिरिक्त सुविधा के लिए नगद-नारायण खर्च करने होते हैं। जेल की व्यवस्था भी चूंकि पुलिस महकमे के अधीन होती है अत: उसमें घूसखोरी होने पर आश्चर्य नहीं होता। शशिकला के लिए जेल में विशेष रसोई एवं अन्य वीआईपी सुविधाओं की बात उजागर कर डीआईजी रूपा ने जो दुस्साहस किया उसके लिए वे बधाई की पात्र हैं। न्यायपालिका को भी इस बारे में संज्ञान लेकर विख्यात और कुख्यात कैदियों को एक ही जेल में रखने की बजाय समय-समय पर अन्य राज्यों की जेलों में स्थानांतरित किए जाने संबंधी व्यवस्था करनी चाहिए। सजा को मजाक बनाने वालों के लिए भी कड़ी सजा का इंतजाम करना जरूरी है वरना जेल का बचा-खुचा भय भी समाप्त हो जाएगा।

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