पहले मप्र के उम्मीदवारों को मिलेगा एमबीबीएस, बीडीएस में प्रवेश

जबलपुर। मध्यप्रदेश के निजी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस व बीडीएस की अनरिर्जव कैटेगरी की सीटों को मप्र के मूल निवासी उम्मीदवारों से भरा जाएगा। सीटें खाली रह जाने पर ये सीटें बाहरी उम्मीदवारों से भरी जाएंगी। इस साल से एनआरआई सीटों में भी पहले मप्र के मूल निवासी को मौका दिया जाएगा।
सीटें खाली रहने पर ही दूसरे राज्यों के एनआरआई को दाखिला मिल सकेगा। एमबीबीएस, बीडीएस प्रवेश नियम 2017 में यह प्रावधान किया गया है। प्रवेश नियम प्रकाशित हो गए हैं। इसके साथ ही काउंसलिंग का शेड्यूल भी बदल गया है। 22 जुलाई की जगह अब 12 जुलाई से काउंसलिंग शुरू होगी।
प्रवेश नियमों में पहली बार ऐसा प्रावधान किया जा रहा है जब निजी कॉलेजों में अनरिजर्व कैटेगरी की सीटों में मप्र के मूल निवासी उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी जा रही है। बाहरी उम्मीदवारों के विरोध के चलते हर साल काउंसलिंग में मप्र के उम्मीदवार हंगामा कर रहे थे। पिछले साल की काउंसलिंग में जमकर विवाद हुआ था।
10 लाख रुपए हुआ सीट लीविंग बांड और रूरल बांड
एक साल की अनिवार्य ग्रामीण सेवा के लिए रूरल बांड अनरिजर्व श्रेणी के लिए इस साल से 10 लाख रुपए कर दिया गया है। रिजर्व श्रेणी के लिए 5 लाख है। इसके पहले क्रमश: 5 और 3 लाख था। इसी तरह से सरकारी कॉलेजों में एडमिशन बंद होने के बाद सीट छोडऩे पर सीट लीविंग बांड अनरिजर्व के लिए 5 से बढ़ाकर 10 लाख और रिजर्व के लिए 3 से बढ़ाकर 5 लाख कर दिया गया है। निजी कॉलेजों में सीट छोडऩे पर पूरे कोर्स की फीस देना होगी।
काउंसलिंग शेड्यूल
रजिस्ट्रेशन- 12 से 17 जुलाई
वाइस फिलिंग व वाइस लॉक- 12-18 जुलाई
प्रोसेस ऑफ सीट एलाटमेंट- 19-23 जुलाई
रिजल्ट सीट (आवंटन)- 24 जुलाई
आवंटित कॉलेज में रिपोर्टिंग-25-30 जुलाई
अपग्रेडेशन-25 से 31 जुलाई
सेकंड राउंड काउंसलिंग
वाइस फिलिंग एवं च्वाइस लॉकिंग- 18-19 अगस्त

सीट आवंटन की प्रक्रिया- 20-22 अगस्त
रिजल्ट- 23 अगस्त
आवंटित कॉलेज में रिपोर्टिंग- 23-25 अगस्त
लेफ्ट आऊट राउंड
च्वाइस फिलिंग व च्वाइस लॉकिंग-26 अगस्त
रिजल्ट- 27 अगस्त
कॉलेज में रिपोर्टिंग- 28-29 अगस्त
एनआरआई सीटों का आवंटन भी करेगी सरकार
इस साल निजी मेडिकल कॉलेजों की एनआरआई सीटों का आवंटन भी सरकार करेगी। पिछले साल निजी कॉलेजों ने खुद एनआरआई सीटों पर दाखिला दिया था। इसके बाद आज भरी गई सीटों की जानकारी आज तक संचालनालय चिकित्सा शिक्षा को नहीं दी है। लिहाजा, राज्य सरकार ने इस साल से सख्ती करते हुए खुद सीट भरने का फैसला लिया है।

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