अमिता को जो करना था कर दिया, अब…

तहसीलदार आम जनता के लिए भले ही बड़ी चीज हो परन्तु प्रशासनिक ढांचे में उसकी अहमियत ज्यादा नहीं मानी जाती। म.प्र. के ब्यावरा में पदस्थ तहसीलदार अमिता सिंह तोमर का प्रकरण इसकी मिसाल है। प्रदेश में तबादला सीजन शुरू होते ही अमिता को ब्यावरा से 700 किमी दूर सीधी स्थानांतरित कर दिया गया। वे चुपचाप चली जातीं तब शायद किसी को पता ही नहीं चलता कि 13 साल की नौकरी में इस महिला तहसीलदार का 9 जिलों की 25 तहसीलों में तबादला किया जा चुका है, जो प्रथम दृष्ट्या चौंकाने वाला है। अब तक शांत होकर आदेश का पालन करती आई अमिता सिंह ने इस बार 700 किमी दूर तबादले से नाराज होकर सीधे प्रधानमंत्री तक अपनी पीड़ा पहुंचा दी जिसकी वजह से वे सुर्खियों में आ गईं। शासकीय आदेश को लेकर प्रधानमंत्री को ट्वीट करना सेवा शर्तों के मुताबिक अनुशासनहीनता माना जाए तब अमिता के विरुद्ध कार्रवाई भी की जा सकती है किन्तु उन्होंने सीधे-सीधे आरोप लगाया है कि उन्हें ईमानदारी से काम करने की सजा मिलती रही हैं तथा हर बार कम से कम 400 किमी दूर पदस्थ किया गया। अमिता के आरोप की सच्चाई तो विश्लेषण का विषय है किन्तु एक तहसीलदार का पद जैसा प्रारंभ में कहा गया प्रशासनिक अमले में इतना अदना माना जाता है कि वह प्रधानमंत्री तो क्या मुख्यमंत्री तक सीधे अपनी बात पहुंचाने के पूर्व सौ मर्तबा सोचेगा। इसीलिए प्रधानमंत्री को ट्वीट के जरिए अपनी पीड़ा अवगत कराने के उसके कृत्य को अनुशासनहीनता की बजाय मानवीय संवेदना के आधार पर देखा जाना चाहिए। तहसीलदार को हमारे समाज में बहुत सम्मान से नहीं देखा जाता जिसका कारण बताने की जरूरत नहीं है लेकिन एक महिला तहसीलदार यदि स्वयं को ईमानदार होने के कारण प्रताडि़त किए जाने की बात प्रधानमंत्री से कह रही हो तो निश्चित रूप से वह उसकी घुटन की सहज अभिव्यक्ति ही है। वरना इस स्तर के कर्मी और अधिकारी तो ले-देकर मनमाफिक जगह पर डटे रहते हैं। तबादला कारोबार को पारदर्शी बनाने का दावा करने वाली शिवराज सरकार को चाहिए कि वह अमिता के मनोभावों को वास्तविकता के धरातल पर उतरकर समझे तथा व्यवस्था में तदनुसार सुधार करे। तबादला सरकार का अधिकार है। कई मर्तबा उसका दंड के तौर पर भी इस्तेमाल होता है परन्तु अमिता सिंह के 13 वर्ष में इतने ज्यादा और दूर-दूर किए गए तबादले अधिकारों का दुरुपयोग ही कहे जाएंगे और यदि वे दंडस्वरूप हैं तब उनका दोष भी स्पष्ट किया जाना चाहिए। अमिता ने तो सही -गलत जो भी करना था कर दिया। अब गेंद राज्य सरकार के पाले में है देखना है। वह क्या करती है?

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