जगन्नाथ रथयात्रा शुरू: भक्तों को दर्शन देने रथ पर सवार हुये जगन्नाथ

पुरी। उड़ीसा के पूर्वी तट पर स्थित जगन्नाथ पुरी में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा का उत्सव आज पारंपरिक रीति के अनुसार धूमधाम से शुरु हुई। भारी तादाद में भक्तजन वहां मौजूद हैं और चारों तरफ जय जगन्नाथ गुंजयमान हो रहा है। इसे गुंडिचा महोत्सव भी कहा जाता है। हर साल आषाढ़ शुक्ल द्वितीया के दिन रथ यात्रा शुरू होती है। आज के दिन भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ अपने जन्मस्थान गुंडिचा मंदिर जाते हैं। वहां नौ दिन तक रहते हैं। गुंडिचा मंदिर पुरी श्री जगन्नाथ मंदिर से करीब तीन किलोमीटर की दूरी पर है। गुंडिचा मंदिर को जगन्नाथ स्वामी का जन्मस्थल भी कहा जाता है क्योंकि इस जगह पर दिव्य शिल्पकार विश्वकर्मा ने राजा इन्द्रध्युम्न की इच्छानुसार जगन्नाथ, बलदेव और सुभद्रा के विग्रहों को दारु ब्रम्ह से प्रकट किया था।
भगवान जगन्नाथ, उनके भाई बलराम और बहन सुभद्रा तीनों को रथों पर बिठाकर खींचा जाता है इस दौरान भक्तों में रस्सी पकड़ कर रथ खींचने की होड़ रहती है कि एक बार वे जगन्नाथ की रथयात्रा का हिस्सा बन सकें। कहते हैं भगवान जगन्नाथ का रथ खींचने से मुक्ति मिल जाती है और फिर उसे दोबारा जन्म नहीं लेना पड़ता। यह रथ लकड़ी के बने होते हैं। जगन्नाथजी का रथ नंदीघोष, बलराम जी का रथ ‘तलध्वजÓ और सुभद्रा जी का रथ देवदलन है। तीनों रथों को जगन्नाथ मंदिर से खींच कर 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थिति गुंडीचा मंदिर तक लिया जाता है। गुंडीचा मंदिर 7 दिनों तक जगन्नाथ भगवान यहीं निवास करते हैं. इसके बाद आषाढ़ शुक्ल दशमी के दिन वापसी जिसे बाहुड़ा यात्रा कहते हैं। इस दौरान पुन: गुंडिचा मंदिर से भगवान के रथ को खिंच कर जगन्नाथ मंदिर तक लाया जाता है।

 

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